लॉकडाउन की स्थिति में अधिकाधिक बच्चों को डिजिटल शिक्षा से जोड़े – कमिश्नर डॉ. अशोक कुमार भार्गव

शहडोल संभाग के कमिश्नर डॉ. अशोक कुमार भार्गव ने निर्देश दिये है कि लॉकडाउन की स्थिति में बच्चों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने का कार्य किया जाय। जिससे उनकी पढ़ाई न रूके और अधिक से अधिक विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता की शैक्षिक सामग्री उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा है कि कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए लॉकडाउन की स्थिति है ऐसे में सभी शिक्षण संस्थाएं बंद हैं तथा परीक्षाएं स्थागित कर दी गई हैं। स्कूल शिक्षा विभाग में डिजी एल.ई.पी. के माध्यम से कक्षा एक से 12वीं तक के विद्यार्थियों को उनके घर में रहने से उनकी पढ़ाई न रूके इसके लिए जिला स्तर, स्कूल स्तर एवं अभिभावक स्तर पर ग्रुप बनाये गए हैं। स्कूल के प्राचार्यों एवं जन शिक्षकों को अधिक से अधिक अभिभावकों को ग्रुप में जोड़ा जाय ताकि राज्य स्तर से प्रतिदिन कक्षावार पाठ्क्रम के अनुसार जो पाठ्य सामग्री भेजी जा रही है उसका अधिक से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिल सके। कमिश्नर डॉ. भार्गव ने शिक्षकों से कहा है कि वह स्वंय भी पढ़े तथा फीडबैक दे। इसके अलावा जिला स्तर डीईओ की अध्यक्षता में जिनमें शिक्षा विभाग के सभी अधिकारी जुड़े हो प्रकोष्ठ का गठन करें जो नियमित एप के माध्यम से कम से कम 100 समूहों का उनके लिंक में जाकर निरीक्षण करें। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि रीवा संभाग एवं शहडोल संभाग के निवासियों ने जिस प्रकार लॉकडाउन का कड़ाई से पालन कर अभी तक कोरोना को परास्त किया है उसी प्रकार पूरी निष्ठा से शिक्षा विभाग के अधिकारी डिजिटल शिक्षा में भी अच्छा कार्य कर प्रदेश में अग्रणी स्थान हासिल करेंगे। डॉ. भार्गव ने स्कूल शिक्षा विभाग के संभाग स्तरीय, जिला स्तरीय एवं ब्लाक स्तरीय अधिकारियों सहित प्राचार्यों एवं शिक्षकों से अपने शिक्षकीय दायित्वों का पालन सुनिश्चित करने की अपेक्षा की है। 

कमिश्नर डॉ. भार्गव ने कहा कि बच्चे हमारे राष्ट्र के भविष्य हैं। कोरोना संक्रमण को लेकर बच्चों के मन पर नकारात्मक दबाव या प्रभाव न रहे इसलिए जरूरी है कि बच्चों के अभिभावक, बड़े बुजुर्ग बच्चों को नैतिक किस्से, कहानियां व प्रसंगों को रोचक ढंग से सुनायें एवं समझायें तथा बच्चों के मन में कोविड-19 के संबंध में जो जिज्ञासायें हैं या प्रश्न हैं उनका सहजता, सरलता से उत्तर दें और उन्हें भी लॉकडाउन के नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करें। बच्चों को बार-बार साबुन से हाथ धोने अपने हाथ से मुह एवं नाक व आंख को अनावश्यक न छूने तथा सोशल डिस्टेंसिंग बनाये रखने की भी समझाइश दी जाय। इस प्रकार हम घर में रहकर भी समय का सदुपयोग कर सकेंगे तथा कोरोना जैसी महामारी को जीतने में सफल हो सकेंगे।

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