*प्रवासी मजदूरो को गांव के स्कूलो मे कोरिन्टीन कराने से ही गांव होगा सुरक्षित,उनका परिवार करे उनके भोजन की व्यवस्था, गर्ग।*

*प्रवासी मजदूरो को गांव के स्कूलो मे कोरिन्टीन कराने से ही गांव होगा सुरक्षित,उनका परिवार करे उनके भोजन की व्यवस्था, गर्ग।*

सीधी अमित श्रीवास्तव।

देश के हर प्रदेशो से आने बाले प्रवासी मजदूर कोरोना की चपेट मे आ रहे है।और अब ये मजदूर अपने गावं पहुच रहे है।गाव मे उनके घरो मे कोरिन्टीन करने की व्यवस्था तो प्रशासन कर दी है,इसके बाद भी पूरा गाव ही हाटस्पाट बनता जा रहा है।मतलब यह कि होम कोरिन्टीन का पालन नही हो पा रहा है।ऐसे मे प्रशासन से लेकर वुद्धजीवियो के लिये चिन्ता का एक विषय बन गया है।बताते चले कि सीधी जिले के कुसमी समाजसेवी एवं पूर्व पत्रकार संतोष गर्ग ने क्षेत्रीय मीडिया से हुयी बैठक मे यह बात कही है कि गांव को सुरक्षित करने के लिये गांव के सरपंच एवं सामजिक कार्यकर्ताओ को सामने आकर प्रशासन का सहयोग करते हुये गांव मे पहुच रहे प्रवासी मजदूरो को उनके खुद के गांव मे ही कोरिन्टीन कराया जाय।एवं उनके भोजन की व्यवस्था स्वयं उनके परिजन अपने अपने घरो से लेकर आये।शोसल डिस्टेन्श की दूरी बनाकर परिजन भोजन दे एवं उनका हालचाल ले।उन्हे 14दिन तक गांव के सेन्टर मे रहकर ही घरो मे प्रवेश दे। प्रशासन द्वारा जमीनी कार्यकर्ता जैसे आगनवाडी,शिक्षक,एनम आशा ,सचिव रोजगार, सहायक इनकी डिवटी वही सेन्टर मे लगा दी जाय जिससे मजदूरो के हर हरकत मे निगरानी रखे।यह बात आदिवासी क्षेत्र कुसमी की स्थिति को भापते हुये पूर्व पत्रकार ने क्षेत्रीय पत्रकारो से चर्चा के दौरान यह बात कही है।और उम्मीद किये है कि गाव के वुद्धजीवी,समाजिक कार्यकर्ता ,नेता इस पर विचार करते हुये सरपंच से ये उम्मीद कर सकते है।

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