जिलाध्यक्ष ने दिया सुखदेव को रोजगार , भीख मांग कर अपना जीवन यापन नहीं करेगा बल्कि खुद मेहनत कर अपना जीवन यापन करेगा

भाजपा के जिलाध्यक्ष ने कर दिया कमाल एक भिखारी की बदल दी किस्मत

सुखदेव अब भीख नहीं मांगेगा बल्कि स्वयं का करेगा रोजगार शहडोल। ऐसा पहली बार देखने को मिला की भाजपा के जिलाध्यक्ष स्वयं एक गरीब को अपनी गोद में उठाकर उसे रोजगार दिया और ट्राई साइकिल मैं बैठाया ऐसे भाजपा के जिलाध्यक्ष को जनता तहे दिल से सलाम करती है, भारतीय जनता पार्टी के नेक एवं इमानदार जिलाध्यक्ष ने आज एक गरीब की किस्मत ही बदल दी जहां एक गरीब भीख मांग कर अपना जीवन यापन करता था लेकिन भाजपा के जिलाध्यक्ष कमल प्रताप सिंह ने उसकी किस्मत ही बदल दी अब वह भीख मांग कर अपना जीवन यापन नहीं करेगा बल्कि खुद मेहनत कर अपना जीवन यापन करेगा यह सब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्म दिवस को पूरा देश सेवा सप्ताह के रूप में मना रहा है। दिगर स्थानों की तो खबर नहीं, लेकिन शहडोल में भाजपा के पदाधिकारियों ने भारतीय जनता पार्टी के द्वारा प्रधानमंत्री के जन्मोत्सव को जिस उद्देश्य से सेवा सप्ताह का नाम दिया था, उसे पार्टी के जिलाध्यक्ष कमल प्रताप सिंह, पूर्व महामंत्री दौलत मनवानी, पूर्व यूमो अध्यक्ष अमित मिश्रा, पार्षद संतोष लोहानी आदि ने अभी से कुछ घंटे पहले गांधी चौराहे के समीप दिव्यांग की बिना किसी स्वार्थ के जो मदद की, उस सेवा ने सेवा सप्ताह के उद्देश्य को साकार कर दिया
नगर के वार्ड नंबर 32 में रहने वाले दिव्यांग सुखदेव तंगहाली के कारण वर्षाे से मुख्यालय के विभिन्न हिस्सों में ही भीख मांगकर जीवन यापन कर रहा था। कोरोना काल ने उसकी तंग हाली को और बद्दतर कर दिया था। वर्षाे से दिव्यांग और गरीबी रेखा के नीचे तंगहाली में जी रहे सुखदेव को नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन से कितनी मदद मिलती रही है, यह बताने की जरूरत नहीं है, बहरहाल अभी से कुछ घंटे पहले गांधी चौराहे से गुजर रहे जिलाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों की सुखदेव पर नजर पड़ी, तो वह अपनी समस्या बताकर फूट-फूटकर रोने लगा
जिलाध्यक्ष कमल प्रताप सिंह ने इस संदर्भ में सामाजिक न्याय विभाग कार्यालय में चर्चा की तो, यह बात भी सामने आई कि उसे तीन पहिया सायकिल मिल सकती है, लेकिन सायकिल मिलने के बाद भी कोरोना काल में उसके लिए पेट भरने की समस्या तो, पहले की तरह मुंह फाड़े खड़ी ही थी। सेवा सप्ताह मना रहे भाजपाईयों ने मिलकर इसके लिए किसी छोटे व्यवसाय का रास्ता निकाला और डबलरोटी, टोस्ट, केक आदि बेचने, वह भी तीन पहिया सायकल-रिक्शा में रखकर शहर में घूम-घूमकर बेचने और इससे पेट पालने का रास्ता निकाल दिया। आनन-फानन में शहर के प्रतिष्ठित बेकरियों से संपर्क कर सुखदेव को कम मुनाफे में सामग्री उपलब्ध कराने की योजना को मूर्त रूप दिया गया और महज हजार रूपये की पूंजी देकर उसे लोगों के सामने हाथ फैलाकर पेट भरने की समस्या से भी निजाद दिला दी।

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